IPC ki dhara 410 Hindi, English

IPC की धारा 410 Hindi, English

IPC ki dhara 410 Hindi, English

चोरी की गई संपत्ति; चुराई हुई संपत्ति व संपत्ति जिसका कब्जा तथा प्राप्ति चोरी द्वारा या उद्यापन द्वारा या लूट के द्वारा अंतरित किया गया हो और वह संपत्ति जिसका आपराधिक दुर्विनियोग किया गया है या जिसके विषय में अपराधिक न्यासभंग किया गया है चुराई हुई संपत्ति कहलाती है।

विवरण👇

👉 वह संपत्ति जिसका कब्जा चोरी द्वारा या उद्यापन द्वारा अंतरित किया गया है और वह संपत्ति जिसका अपराधिक दुर्विनियोग किया गया है या जिसके विषय में अपराधिक न्याय भंग किया गया है चुराई हुई संपत्ति कहलाती है चाहे वह अंतरण या वह दुर्विनियोग या न्यासभंग किया गया हो भारत के भीतर किया गया हो या बाहर किया गया ,किंतु यदि ऐसी संपत्ति तत्पश्चात ऐसे व्यक्ति के कब्जे में पहुंच जाती है जो उसके कब्जे के लिए अवैध रूप से हकदार है ,तो वह चुराई हुई  संपत्ति नहीं रह कहलाएगा।

👇 dhar 410 में निम्नलिखित संशोधन हुए

(१) 1891 के अधिनियम में 12 की धारा 2 और अनुसूची 1 और 1882 के अधिनियम संख्या 8 की धारा 9 द्वारा “का अपराध” शब्द निरसित है।

(२) 1882 के अधिनियम सं० 8 की धारा 9 द्वारा अंत:स्थापित है।

(३) “ब्रिटिश भारत”शब्दों के स्थान पर क्रमशः भारतीय स्वतंत्रता (केंद्रीय अधिनियम तथा अध्यादेश अनुकूलन)आदेश,1948 विधि अनुकूलन आदेश 1950 और 1951 के अधिनियम सं० 3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा प्रतिस्थापित

भारतीय दंड संहिता के शब्दानुसार

👉 ipc ki dhara 410 सजा और जमानत का प्रावधान

अपराधी को दंड के रूप में 10 साल कैद की सजा दी जा सकती है तथा यह गैर-जमानतीय एक संज्ञेय अपराध है तथा अदालत द्वारा माना जाने वाला अपराध है और यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है और ना ही जमानतीय अपराध है

MUST READ

IPC section 410👇

Stolen property 

Stolen property and property the possession and receipt of which has been transferred by theft or by extortion or by robbery and property which has been criminally misappropriated or in respect of which criminal breach of trust has been committed is called stolen property.

Explanation👇

👉Property the possession of which is transferred by theft or by extortion, and property which has been criminally misapplied or in respect of which criminal justice has been breached,

is called stolen property, whether by transfer or misappropriation or breach of trustmade within,

 or taken out of India, but if such property subsequently falls into the possession of a person who is illegally entitled to the possession thereof, it shall cease to be stolen property.

Following amendments were made in section 410:👇

(1) In the Act of 1891, the word “offence of” is repealed by s. 2 of 12 and Schedule I and s. 9 of Act No. 8 of 1882.

(2) Ins. by Act No. 8 of 1882, s. 9.

(3) for the words “British India”, substituted by the Indian Independence (Central Act and Ordinance Adaptation) Order, 1948, Adaptation of Laws Order, 1950 and Act No. 3 of 1951, in section 3 and Schedule respectively

According to the words of the Indian Penal Code

👉IPC 410 Section Punishment and Bail provision of;

The offender can be punished with imprisonment up to 10 years and it is a cognizable offense non-bailable and an offense to be considered by the court and this offense is not a compoundable offense nor a bailable offense. HL

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