सेरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021

सेरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021

👉 सेरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 (Surrogacy regulation)act,2021 सुर्खियों में क्यों 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सरोगेसी की प्रक्रिया को विनियमित करने से संबंधित सेरोगेसी (विनियमन)विधेयक 2020 को मंजूरी प्रदान कर दी है ।

संसद ने सेरोगेसी (विनियमन )विधेयक ,2021 पारित किया था। यह राष्ट्रपति के अनुमोदन के पश्चात कानून बन गया है । 

ज्ञातव्य है कि नवीनतम विधेयक अगस्त 2019 में लोकसभा से पारित सरोगेसी (विनियमन )विधेयक 2019 का संशोधित संस्करण  है 

क्योंकि 2019 के विधेयक को राज्यसभा में प्रवर समिति ( select committee)को भेज दिया गया था l

👉सरोगेसी की परिभाषा👇

सेरोगेसी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक महिला इस इरादे से एक इच्छुक दंपत्ति के लिए बच्चे को जन्म देते हैं कि जन्म के बाद वह महिला बच्चे को इच्छुक दंपत्ति को सौंप देगी ।

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👉विधेयक के मुख्य बिंदु👇

👉यह विधेयक सरोगेसी से संबंधित प्रभावी विनियमन सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रीय सरोगेसी बोर्ड (national surrogacy board) एवं राज्य स्तर पर राज्य सैनिक बोर्ड ( State surrogacy board)के गठन का प्रावधान करता है ।

👉 विधेयक के अनुसार केवल भारतीय दंपत्ति ही सरोगेसी का विकल्प चुन सकते हैं ।

👉यह विधेयक इच्छुक भारतीय नि:संतान विवाहित जोड़े जिसमें महिला के उम्र 25 से 30 वर्ष और पुरुष की उम्र 26 से 55 वर्ष हो को नैतिक परोपकारी सरोगेसी की अनुमति देता है ।

👉इसके अतिरिक्त यह विधेयक यह सुनिश्चित करता है कि इच्छुक दंपत्ति किसी भी स्थिति में सेरोगेसी से पैदा हुए बच्चे को छोड़ नहीं सकते नवजात बच्चा उन सभी अधिकारों का हकदार होगा जो एक प्राकृतिक बच्चों को उपलब्ध होते हैं ।

👉यह विधेयक सरोगेसी क्लीनिक को विनियमित करने का भी प्रयास करता है ।

👉 विधेयक सरोगेट मदर के लिए बीमा कवरेज सहित विभिन्न सुरक्षा उपायों का प्रावधान करता है बीमा कवरेज को 16 महीने से बढ़ाकर अब 36 महीने पर दिया गया है ।

👉विधेयक में इस बात को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि सेरोगेसी की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का लिंग चयन नहीं किया जा सकता है ।

👉सरोगेसी के प्रकार

1-परोपकारी सरोगेसी (Altruistic surrogacy): इसमें गर्भावस्था के दौरान चिकित्सा खर्च और बीमा कवरेज के अलावा सरोगेट मां को कोई मौद्रिक मुआवजा नहीं दिया जाता है।

2-व्यावसायिक सेरोगेसी(commercial surrogacy): इसमें सरोगेसी या उससे संबंधित प्रक्रियाओं में बुनियादी चिकित्सा खर्च और बीमा कवरेज के साथ-साथ मौद्रिक लाभ या पुरस्कार भी शामिल होता है ।

👉महत्वपूर्ण बिंदु👇

👉भारत में इसे पहली बार वर्ष 2002 में वैद्य बनाया गया था इसके बाद भारत विश्व की “किराए की कोख “का केंद्र बन गया ।

👉 हालांकि इसमें शामिल बच्चों के लिए उचित कानूनी और सुरक्षा उपायों की कमी के कारण अनेक नैतिक कानूनी चुनौतियां उत्पन्न हुई है ।

👉सरकार ने वर्ष 2015 में विदेशी नागरिकों के लिए सरोगेसी पर प्रतिबंध लगा दिया है ।

निष्कर्ष

आशा करते हैं कि आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी अवश्य पसंद आई होगी यदि आप हमें किसी भी प्रकार का सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएं ।

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धन्यवाद 😊

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